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दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाये गए कई ऐसे पैंतरे जिससे क्राइम ग्राफ कम दिखे

हर मौत जिसकी वजह सवालों के घेर में आ जाए उसकी जवाबदेही पुलिस की होती है. लेकिन दिल्ली पुलिस अपना क्राइम ग्राफ कम रखने के लिए काई मौतों को या तो खुदकुशी का नाम दे रही है या फिर हादसा साबित कर देती है. महीनों की तफ्तीश में ये खुलासा हुआ है

दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाये गए कई ऐसे पैंतरे जिससे क्राइम ग्राफ कम दिखे
ANIL ARORAANIL ARORA | Updated: Tuesday, September 25, 2018, 05:05

महीनों की तफ्तीश में ये खुलासा हुआ है। मौत की वजह तलाशने के लिए पुलिस को सैकड़ों अधिकार और बहुत से साइंटिफिक तरीके हैं. इसमें सबसे पहला है शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अगर इससे मौत की वजह साफ नहीं होती तो विसरा लिया जाता है और इसकी जांच कराई जाती है. इसके अलावा मौके पर मिले सबूत भी बेहद अहम होते हैं. पोस्टमॉर्टम और विसरा रिपोर्ट से लगभग ये तय हो जाता कि मौत की वजह क्या थी एशिया के सबसे बड़े पोस्टमार्टम हाउस यानी की सब्जी मंडी पोस्टमॉर्टम में टीम को 200 विसरा सैंपल पड़े मिले जिसमें 2014 से रखा हुआ विसरा सैंपल भी था. पोस्टमार्टम हाउस की रेकार्ड डायरी के मुताबिक कई विसरा सैंपल पुलिस ने महीनों बाद यहां से लिए. नियमों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह साफ न होने पर विसरा लिया जाता है.
पोस्टमार्टम हाउस की रेकार्ड डायरी के मुताबिक कई विसरा सैंपल पुलिस ने महीनों बाद यहां से लिए. नियमों के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह साफ न होने पर विसरा लिया जाता है. पोस्टमॉर्टम करने वाला डॉक्टर विसरा पुलिस को सौंप देता है जिसे 72 घंटे के अंदर लैब में पहुंचाना पुलिस की जिम्मेदारी होती है. विसरा रिपोर्ट के आधार पर फाइनल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनती है जिसकी एक कॉपी पीड़ित को दी जाती है और यही अदालत में पेश होती है. जिस विसरा को 72 घंटे के अंदर लैब पहुंचाना होता है. वो 4 साल से पोस्टमॉर्टम हाऊस में ही रखा है और एक्सपर्ट के मुताबिक अब इनकी जांच भी की जाए तो कोई सुराग मिलना मुश्किल है
कई परिवार ऐसे हैं जिनके अपनों की संदिग्ध मौत पर दिल्ली पुलिस ने सुसाइड या हादसे की मुहर लगाई हुई है. 2017 में नितिन और शिवकुमार का शव आनंद रेलवे ट्रैक पर मिला था. पुलिस ने दोनों शवों का 2 जनवरी 2017 को पोस्टमॉर्टम कराया लेकिन नितिन का मामला आनन्द विहार थाने में दर्ज किया गया और शिव कुमार के मामले को आनन्द विहार रेलवे स्टेशन थाने में दर्ज किया गया. पुलिस के मुताबिक शिव कुमार का शव रेलवे ट्रैक पर मिला इसलिए उसका मामला आनन्द विहार रेलवे स्टेशन थाने में दर्ज किया. जबकि नितिन का शव रेलवे ट्रैक के बगल में मिला इसलिए मामला आनन्द विहार थाने में दर्ज किया.
परिवार का कहना है कि शव की हालत देखकर कोई नहीं कह सकता था कि इनकी मौत ट्रेन से कटने से हुई है. किसी ने मामले को हादसा बनाने की कोशिश की है. जांच पर सवाल इसलिए भी है क्योंकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत की वजह पूरी तरह साफ नहीं थी इसलिए दोनों का विसरा लिया गया लेकिन पुलिस ने सिर्फ शिव कुमार के विसरा की जांच कराई और शिव कुमार की विसरा रिपोर्ट के आधार पर नितिन की जांच रिपोर्ट तैयार कर दी. हैरानी की बात ये है कि अदालत में पुलिस ने शिव कुमार की विसरा रिपोर्ट पेश करते हुए ये कहा कि दोनों की मौत की वजह एक जैसी ही है. साथ ही पीड़ित के परिवार को आज तक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट नहीं सौंपी गयी है. पुलिस दोनों की मौत को रेल हादसा बता रही है लेकिन हादसे वाले रात को एक ट्रेन के ड्राइवर ने ये सूचना दी थी कि रेलवे टैक्र के बीचों बीच एक शव पड़ा था जिससे ये लगता है कि दोनों मृतकों की टक्कर ट्रेन से नहीं हुई थी. परिवार का भी आरोप है कि अगर मौत ट्रेन से कटने से होती तो शव के परखच्चे उड़ जाते.दूसरा मामला दिल्ली की रहने वाली आरती की मौत का है जिसकी मौत 27 अप्रैल 2018 को उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुई थी और पोस्टमॉर्टम 29 अप्रैल 2018 के दिल्ली के सब्जी मंडी पोस्टमॉर्टम हाउस में कराया गया. आरती का शव रायबरेली से एक एम्बुलेंस में दिल्ली आया जिसके ड्राइवर ने 600 किलोमीटर से ज्यादा का सफर सिर्फ एक पर्ची पर तय कर लिया. उस पर्ची पर न तो किसी अस्पताल का नाम था और न ही पता. बस आरती के घर का गलत पता लिखा था. उस ड्राइवर के पास उत्तर प्रदेश पुलिस का भी कोई कागज नहीं था. घरवालों ने आरती का शव देखने के बाद पुलिस को जानकारी दी. इसके बाद पुलिस एम्बुलेंस और उसके ड्राइवर को अपने साथ ले गई. आरती के चाचा का आरोप है कि उसके बाद से आज तक उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली. परिवार के बार बार चक्कर लगाने के बाद पुलिस ने अब तक सिर्फ ये बताया है कि मौत कुछ खाने से हुई थी. लेकिन इसके बाद हर सवाल पर पुलिस चुप है. ना तो विसरा जांच पर कोई जानकारी है ना ही शव के रायबरेली से दिल्ली तक पहुँचने के पीछे कोई कारण जानने की कोशिश.

ऐसे ही, डॉक्टर सर्वेश के बेटे अमित सिंह की मौत 7 जून 2016 को हुई थी. उसका शव दिल्ली के पास बवाना की मुनक नहर में मिला था. डॉक्टर सर्वेश के मुताबिक पुलिस शुरु से इस मामले को हादसा बताकर खत्म करने की कोशिश कर रही है. पुलिस बार बार यही कह रही है कि अमित की मौत नहर में डूबने से हुई है. लेकिन सवाल ये है कि 6 फीट का अमित सिर्फ 4 फीट पानी में कैसे डूब गया? इस केस में एक अहम सुराग 29 जून को मिला जब अमित का वो फोन चालू हो गया जिसे पुलिस ये बता रही थी कि वो नहर में बह गया है. फोन मिलने के बाद ही हत्या का मामला दर्ज किया गया. विसरा की जांच के बहाने पुलिस अपना क्राइम ग्राफ कम करने में कामयाब होती है क्योंकि विसरा रिपोर्ट के इंतजार में जांच लटकी रहती है और केस जांच के इंतजार में फंस जाता है. जांच में फंसे मामले पुलिस के क्राइम रेकार्ड में दर्ज नहीं होते और पुलिस पर जांच का दबाव भी नहीं होता है.

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